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किरण आंटी की गाण्ड मारी

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मेरा नाम राजपाल है। उम्र २५ साल है। बात उस समय की है जब मैं १८ साल का था। मेरे पड़ोस में एक आंटी किरण अपनी बेटी नेहा और ससुर के साथ रहती थी। उनके पति का स्वर्गवास हो चुका था और सास भी नहीं थी। एक बेटा था जो विदेश में रहता था। परिवार धनी था। मेरा और उनका मकान सटा हुआ है और मेरे घर की छत से उनके आंगन में देखा जा सकता था।
एक दिन शाम के समय मैं छत पर घूम रहा था कि अचानक मेरी नजर उनके आंगन में पड़ी। मैंने देखा कि नेहा नाली के पास बैठकर पेशाब कर रही थी। उसकी चिकनी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
उसने लाल रंग की पैन्टी पहन रखी थी। उसके चूतड़ काफी बड़े थे। मैंने इससे पहले कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया था। वह उठी पैन्टी उपर चढ़ाई और अंदर चली गई। मैंने उस रात सपने में उसे चोदा और मेरा झड़ गया। सुबह मैं जल्दी उठा क्योंकि मुझे उठना पड़ा। नहाकर मैं कपड़े फैलाने छत पर गया तो मैं उसके आंगन में झांका, कोई नहीं था। मैं छत पर टहलने लगा। इस दौरान मैंने उसके आंगन में कई बार झांका। जब मैं वापस जाने लगा तो सोचा एक बार और देख लूँ शायद उसकी गाण्ड दिख जाए।
ज्योंही मैं वहाँ पहुँचा, मैंने इस बार आंटी को पेशाब करते पाया। वह बड़े इत्मिनान से अपनी मैक्सी उठाकर मूत रही थी। उसने काली पैन्टी पहन रखी थी। जब वह उठी तो उसने अपनी पैन्टी में से एक कपड़े का टुकड़ा निकाला और उसे पास रखे कूड़ेदान में डाल दिया। उनका मासिक चल रहा था। वह ज्योंही पीछे मुड़ी मैं तेजी से पीछे हटा पर शायद उसने मुझे देख लिया। मैं डर गया कि अब तो वह मेरी शिकायत मेरे घरवालों से जरुर करेगी। खैर कुछ दिनो तक मैं छत पर नहीं गया।
फिर एक दिन हिम्मत करके मैं छत पर गया। मैंने किरण आंटी को नेहा के साथ टहलते छत पर पाया। किरण आंटी ने मेरी ओर घूर कर देखा फिर दोनो रेलिंग से सट कर मेरी ओर पीठ कर खड़ी हो गई। नेहा जीन्स तथा किरण आंटी मैक्सी पहने हुई थी। वे रेलिंग पर झुककर बातें करने लगी। इस दौरान मैं उनकी गाण्ड निहारता रहा।
मेरे घर पर कुछ कन्सट्रक्शन का काम चल रहा था। दूसरी मंजिल की छत बन रही थी। चूंकि हमारा हैण्डपंप काफी पुराना था इसलिए हमें किरण आंटी से पानी के लिए कहना पड़ा। खैर वह खुशी से तैयार हो गई। मैंने एक वाटर पंप उनके छत पर टंकी में लगा दिया। मुझे वहाँ करीब एक घण्टा रुकना पड़ता था। चूँकि जून का महीना था इसलिए गर्मी काफ़ी अधिक थी। खैर इस दौरान मैं सीढ़ियों पर बैठा रहता। कभी कभार वह मुझे चाय पानी पूछ लेती।
एक दिन मैं सीढ़ियो पर बैठा था कि आंटी मेरे पास आई और बोली- मैं नहाने जा रही हूँ कोई आये तो देख लेना।
मैंने कहा- ठीक है।
कुछ देर बाद उनका दूध वाला आ गया। मैंने कहा वो नहा रही हैं तुम इंतजार करो।
उसने कहा- आप ही ले लो ! किचन में कोई बर्तन पड़ा होगा।
मैंने सोचा- आंटी से एक बार पूछ लूँ।
मैं बाथरुम की ओर बढ़ा। ज्योंही दरवाजे पर पहुँचा तो देखा दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं है। अंदर देखा तो आंटी फर्श पर बैठकर कपड़े साफ कर रही थी, वह पूरी तरह नंगी थी। उनकी गाण्ड मुझे दिखाई दे रही थी। जब वह कपड़ों पर ब्रश लगाने के लिए आगे झुकती तो उनकी गाण्ड ऊपर उठ जाती और छेद दिखाई दे जाता। मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैं पूरी तरह उत्तेजित था। मन कर था कि अंदर घुस जाऊँ और उनकी गाण्ड़ मारने लगूँ।
खैर मैं किचन में गया और एक बर्तन लाकर दूध ले लिया। तभी मेरे घर से पानी के लिए बुलावा आ गया। मैं पानी चलाकर लौटा तो आंटी नहाकर कपड़े फैलाने आ रही थी। मैं सीढ़ियों पर बैठ गया और जब वह सीढ़ियाँ उतरने लगी तो मैं उनकी गाण्ड निहारने लगा। कुछ देर बाद वह तमतमाते हुए आई और मुझसे पूछा- दूध तुमने लिया है?
मैंने कहा- हाँ !
किससे पूछकर?
किसी से नही। क्यो? मैंने कहा- दूधवाले को जल्दी थी तो उसने कहा कोई बर्तन लाकर मैं ही ले लूँ ! गाण्ड मराने जाना था क्या साले को ! वह बुदबुदाई।
इस पर मैं हँस दिया तो वह बोली- वो तेरा यार लगता था क्या? मुझसे नहीं पूछ सकता था?
आप नहा रही थी।
तो आकर दरवाजा तो खटखटाया होता?
मैं गया था पर आपको उस हालत में देखकर लौट आया।
क्यों इससे पहले तो छत पर से छुप-छुप कर देखता था इस बार क्या हुआ?
मैं सकपका गया।
क्यों जानकर फट गई।
तेरी माँ से तेरी शिकायत करुंगी।
प्लीज आंटी ! ऐसा मत करना ! मैं गिड़गिड़ाया।
ना तुझे सबक सिखाना जरुरी हैं, वह बोली।
मैंने उनके पैर पकड़ लिए और गिड़गिड़ाने लगा- प्लीज आंटी ! इतनी छोटी गलती की इतनी बड़ी सजा मत दो।
सजा तो और भी बड़ी मिलेगी, जब मैं कालोनी के सब लोगों को बताउंगी कि इनका लड़का छत पर से मेरे आंगन में झांकता है और हमारी गाण्ड देखता है।
मेरी बुरी तरह फट गई। मैं थोड़ा और गिड़गिड़ाया।
तब उन्होने पूछा- अच्छा ये बता तू मेरी गाण्ड क्यो देखता है?
बस दो बार देखी है।
और मेरी बेटी की?
एक बार ! वह भी गलती से। देखकर क्या करता है?
मुठ मारता हूँ।
यह बता कि किसकी गाण्ड ज्यादा सेक्सी है?
आपकी !
क्यों?
क्योंकि आपकी ज्यादा चौड़ी और मांसल है और आपका छेद भी बड़ा लगता है अंकल ने काफ़ी मेहनत की थी।
वह थोड़ा मुस्कराई।
मैं समझ गया कि लोहा गर्म हो रहा है।
मैं फिर बोला- जब आप चलती हैं तो आपके दो नितम्ब बारी-बारी ऐसे ऊपर नीचे होते हैं मानो कयामत चल रही हो।
और उन्होने फिर पूछा- और? बस- मैं बोला।
फिर वह बोली- तू बैठ मैं चाय लाती हूँ।
हमने सीढ़ियों पर बैठ कर चाय पी। इस दौरान वे काफ़ी खुल गई। उन्होने मेरी गर्ल-फ्रेन्ड के बारे में पूछा। उन्होने फिर पूछा कि मैंने किसी को चोदा है कि नहीं।
मैं बोला- नहीं ! अभी तक मौका नहीं मिला।
फिर वो बोली- मैं बर्तन रखकर अभी आई।
जब वह जा रही थी तो मैंने देखा कि उनकी मैक्सी उनकी गाण्ड के ठीक नीचे गीली हो गई थी। मैं समझ गया कि वह उत्तेजित है और उनकी बुर पानी छोड़ रही है। मैंने सोचा- साली बहुत अकड़ रही थी, मादरचोद को इतना उत्तेजित करता हूँ कि झड़ जाए।
वह आई और मेरे पास बैठ गई। मैंने कहा- एक बात पूछूं ? आंटी !
वह बोली- पूछ !
अंकल आपकी गाण्ड मारते थे न?
वह बोली- हाँ !
बहुत मजा आता है क्या मरवाने में?
कभी किसी की ले के देख !
एक बार ली है !
किसकी?
जहॉ पहले दूध लेने जाता था, उस दूध वाले की एक लड़की थी, मुझसे दो साल छोटी रही होगी। मैं रोज उसके साथ खेलता था। बगल में एक नया मकान बन रहा था। हम रोज उसमें लुक्का-छिप्पी खेलते थे।
अच्छा तो तूने उसे बहलाकर अपना शिकार बनाया?
सुनिए तो आंटी ! एक दिन उसने मुझसे कहा कि उसे मुझे कुछ दिखाना है।
अच्छा ! तो साली ने तुझे अपना शिकार बनाया?
पूरी बात बात तो सुनिए ! वह मुझे एक कमरे में ले गई और कहा- ऊपर कुछ किताबें है, उन्हें उतारिए।
मैंने टाँड पर रखी दो-तीन किताबें उतारी। वे सब अश्लील साहित्य से संबंधित थी।
मैंने उससे पूछा- तुझे पढ़ना आता है?
वह बोली- नहीं !
फिर मैंने कहा- ये तेरे काम की नहीं हैं।
उसने वि किताबें मुझसे ले ली और उन्हें उलटने-पलटने लगी, फिर बोली- एक और होगी !
मैंने उछलकर देखा- वह सही थी।
मैंने उसे उतारा। वह अश्लील चित्रों की पुस्तक थी, उसमें संभोग की विभिन्न क्रियाएँ दर्शाई गई थी।
मैंने पूछा- ये कहाँ से मिली तुझे?
वह बोली- यही थी, कई दिनों से यहीं पड़ी हैं।
वह बोली- ये लोग क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- तू किसी से कहेगी तो नहीं?
वह बोली- नहीं कहूँगी।
मैंने कहा- ये लोग चुदाई-चुदाई खेल रहे है।
यह कौन सा खेल है?
यह बड़ों का खेल है, तू बड़ी हो जाएगी तो तू भी खेल सकेगी !
अभी नहीं खेल सकते- वह बोली।
उसके लिए तेरा पति चाहिए !
तू नहीं खेल सकता?
मैं?
मैं सकपकाया, फिर सोचा कि देखने में क्या जाता है !
फिर उसने अपनी चड्डी सरका दी। मैंने भी अपनी पैंट की जिप खोल कर लूली बाहर निकाली। फिर उसके पीछे चिपक गया। कुछ देर में मेरी लूली बढ़ने लगी और मैंने पहली बार अपनी लूली को लण्ड होते देखा।
मैंने उसकी गाण्ड पर अपना दबाव बढ़ा दिया। उसे भी अच्छा लगा तो उसने और जोर लगाने को कहा।
इधर मेरी बातें सुनकर आंटी की साँसें तेज हो गई। वह बार- बार फिर ! फिर ! कह रही थी।
खैर मैं आगे बढ़ा !
फिर मैंने दो-चार बार धक्का लगाया और हमें काफ़ी अच्छा लगा। मैं फिर धक्का लगाने लगा।
एक दिन मैंने उसकी गाण्ड में अपना आधा लण्ड भी डाल दिया उसे काफ़ी दर्द हुआ और १० दिन तक उसने मुझे छूने नहीं दिया। लेकिन ज्यादा दिनों तक वह खुद को रोक नहीं पाई। फिर उसकी आदत हो गई। अब मैं अराम से अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में डालकर उसे चोदता। मुझे तो काफ़ी मजा आता पर उसकी प्यास शांत नहीं हो पा रही थी।
मेरा वीर्य भी निकलना शुरु हो गया। एक दिन उसकी बड़ी बहन ने हमें पकड़ लिया और फिर मैं उसे कभी नहीं चोद पाया।
आंटी ने कहा- बस बहुत हो गया ! मैं अभी आई !
वह उठी और जाने लगी। उनकी मैक्सी पीछे से चूतड़ के नीचे पूरी तरह भीग चुकी थी, फर्श भी गीला था। लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका और हथौड़ा भी तैयार था। मैं उनके पीछे चल दिया, वे बाथरुम में घुसी पर दरवाजा बंद नहीं किया। मैं पहुँचा तो देखा- वह पेशाब के लिए मैक्सी उपर उठा कर बैठी थी और अपनी बुर में उंगली डाल-निकाल रही थी।
मैं उनके पीछे जाकर बैठ गया और अपनी उंगली उनकी गाण्ड में डाल दी, फिर अंदर-बाहर करने लगा। वह उत्तेजना में आवाजें निकालने लगी और अपनी गाण्ड उठाकर डॉगी स्टाइल में हो गई। फिर मैंने उनकी जांघों को फैलाया और अपनी जीभ से उनकी बुर चाटने लगा।
आनंद से उनका बदन ऐंठने लगा, आवाज ऊंची हो गई। वे जोर जोर से अपनी गाण्ड मेरे चेहरे पर मारने लगी, काबू करना मुश्किल हो रहा था तो मैंने अपना लोअर और चढ्ढी उतार फेंकी फिर मैंने उनकी चोटी को घोड़े की लगाम की तरह पकड़ी और उनकी गाण्ड में अपना लण्ड सटाया और चोटी को जोर से खीचा। वह दर्द की वजह से पीछे हटी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में तेजी से घुस गया। वह चिल्लाई- अरे हरामी ! जानता नहीं कि बहुत दिनों से किसी ने मेरी गाण्ड नहीं मारी है ! आराम से नहीं कर सकता क्या !
फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए। उन्हें आनंद आने लगा तो मैंने स्पीड बढ़ा दी। वह गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी। फच्च-फच्च की आवाजें आ रही थी। वे आह ! आहऽऽ आउच ! पेल दे ! फॉड़ दे ! चोद दे ! छोड़ना मत साले ! करके चिल्ला रही थी।
मैं चरम पर पहुँच गया तो वे बोली कि वह झड़ने वाली है।
मैंने अपनी पूरी ताकत समेटी और स्पीड बढ़ा दी, वह झड़ गई। मैंने दो तीन इतने जोर के धक्के लगाए कि मानो मेरा लण्ड उनके मुँह से निकल आएगा।
मैं तेजी के साथ झड़ा और उनकी गाण्ड अपने गर्म लावे से भर दी। मैं उसी के ऊपर निढाल होकर लेट गया। हम कुत्ते की तरह हाँफ रहे थे। वह सीधी हुई और मेरा माथा चूमकर बोली- आज कई सालों बाद किसी ने इतनी मस्त चुदाई की है ! जी करता है कि तेरा लण्ड चूम लूँ।
मैंने कहा- तो चूम लो !
ला ! तू भी क्या याद करेगा कि किसी मादरचोद से पाला पड़ा़ है ! पर पहले एक कप चाय हो जाए ! यह बोलकर वह उठी और किचन में चली गई। मैंने अपना लण्ड साफ किया, कपड़े पहने और उसके पीछे हो लिया। हम दोनों बातें करने लगे।
बातों बातों में उन्होंने मुझे बताया कि उनके ताऊ का बेटा जो करीब उसकी ही उम्र का था, एक बार जाड़े में उसके यहाँ रहने आया। चूंकि उसके लिए सोने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी इसलिए मैंने उसे अपने बगल में जगह दे दी। उसकी पैर फेंककर सोने की आदत थी। वह मेरे उपर अपना पैर डाल देता। मैंने कई बार उसका पैर अपने ऊपर से हटाया, उसे जगाया और कहा भी ठीक से सोए।
उसने कहा कि वह कोशिश करेगा !
पर कर न सका। फिर मेरी भी आदत हो गई। हम एक ही रजाई में चिपककर सोने लगे। एक दिन मैंने नींद में अपनी गाण्ड पर किसी कड़ी वस्तु का दबाव पाया। मेरी नींद खुल गई। मुझे लगा कि उसने अपनी जेब में कुछ रखा है और मैंने पलटकर उस चीज को पकड़ लिया। वह उसका औजार था। मैंने उसे खींचा तो मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया। पर तब तक उसकी नींद खुल चुकी थी। उसने पूछा- क्या हुआ?
जब मैंने बताया तो वह हंस पड़ा।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने कहा कि तू इतनी बड़ी हो गई पर तुझे इतनी छोटी सी बात नहीं पता।
फिर उसने कहा- ऐसा हो जाता है, तेरी चिपक कर सोने की आदत नहीं है न, इसलिए तुझे अजीब लगा।
मैंने सोचा- सामान्य बात है, फिर मैंने ध्यान नहीं दिया।
मुझे भी अब अच्छा लगने लगा। एक दिन उसने रात अपना लण्ड मेरी गाण्ड से सटाकर कुछ धक्के लगाए तो मैंने कोइ विरोध नहीं किया। फिर क्या ! उसे हरी झण्डी मिल गई और वह चालू हो गया। वह रोज धक्के लगाता। वह मेरी चड्डी में हाथ डालकर मेरी गाण्ड व बुर सहलाने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा। अब वह मेरी चड्डी उतारकर मेरी गाण्ड मारने लगा। पर जब वह वह मेरी बुर में धक्का लगाता तो मुझे ज्यादा आनंद आता। इसलिए मैं बार बार उसका लण्ड अपने बुर में सटाती और उसे धक्का लगाने को कहती। वह कुछ देर तक करता फिर गाण्ड मारने लगता।
खैर ये सब चलता रहा जब तक वह वापस नहीं चला गया। वह चला तो गया पर मुझे बुरी लत लगा गया। मेरी हवस बढ़ती गई। पहले मैंने उँगली डालना शुरु किया फिर मोमबत्ती फिर न जाने क्या क्या। मेरी झिल्ली भी फट चुकी थी।
दो साल बाद ताऊ के यहाँ शादी पड़ी। हम वहाँ गए। चूंकि गाँव का इलाका था इसलिए हमें खेत में जाना पड़ता।
एक दिन दोपहर में मैं फ्रेश होने निकली और गन्ने के एक खेत में घुस गई। जब मैं करके उठी तो पीछे से किसी ने मेरा मुँह जोर से बंद कर दिया। सामने ताऊ का लड़का आ गया और उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे कर दिया फिर मेरी पैन्टी के उपर से ही मेरी बुर चाटने- चूसने लगा।
मुझे अपनी गाण्ड पर किसी हथौड़े जैसे लण्ड का दबाव महसूस हो रहा था। मैं बहुत दिनों से चुदवाना चाहती थी इसलिए प्रतिरोध नहीं किया तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया। फिर मेरी पैन्टी उतार दी और मुझे टाँगें फैलाने को कहा।
मैंने वैसा किया तो एक ने मेरी बुर और दूसरे ने गाण्ड चाटनी शुरु कर दी। शीघ्र ही मैं झड़ गई।
फिर एक ने पीछे से और दूसरे ने आगे से डालना शुरु किया। थोड़ा दर्द हुआ पर जल्दी सब ठीक हो गया। दोनों ने मुझे जमकर चोदा। मेरी दो साल की प्यास मिटा दी। हम वहाँ एक हफ़्ते रुके, इस दौरान मैंने ६ बार चुदाई करवाई।
आंटी की कहानी सुनकर मैं फिर उत्तेजित हो गया। मैंने उनके पास पहुँच कर उनको अपनी बाहों में भर लिया, उनसे चूमा-चाटी करने लगा। मैंने गैस बुझा दी और आंटी से कहा- चाय बाद में पियूंगा, पहले मैं दूध पियूंगा।
वह मुस्कराई।
मैं उन्हें उनके बेडरुम में ले आया और बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैक्सी उतार दी। पूरा मैदान साफ था। मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके और उनके ऊपर लेट गया। मैं उनके होठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। वे पूरी तरह लाल हो गए।
फिर मैं नीचे सरका और चूचियों पर टूट पड़ा। बारी बारी से दोनो चूचियाँ मुँह में भरकर चूसने लगा। दोनों एकदम कड़ी होकर सीधी तन गई। आंटी का बुरा हाल था। उनकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी। वे आह आउच कर रही थी। उनकी साँसें काफ़ी तेज चल रही थी।
फिर उन्होंने कहा- अब मेरी बारी !
वह मेरी छाती पर बैठ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। उनकी बुर लगातार मेरे सीने पर पानी छोड़ रही थी। चिकनाई के कारण उनकी गाण्ड आगे पीछे सरक रही थी। मैंने उनकी जाँघ पकड़ कर उन्हें अपनी ओर खींचा और उसकी बुर को ठीक अपने मुँह पर ला दिया और चाटने लगा। काफी देर तक हम यह करते रहे और फिर पहले मैं तेजी से झड़ा बाद में वो।
हम निढाल होकर उसी तरह पड़े रहे। उनकी बुर मेरे मुँह पर और मेरा लण्ड उनके मुँह में पड़ा रहा।
बाद में मैं उठा, खुद साफ किया और घर चला आया। फिर जितने दिन मैं पानी के लिए उनके यहाँ गया, रोज दो बार उन्हें चोदा। वह पूरी तरह मेरी कायल हो चुकी थी।
जब भी मैं अपनी छत पर अकेला होता तो वह आंगन में आ जाती और मुझे अपनी गाण्ड, बुर चूचियाँ दिखाती। वह मेरे सामने हस्तमैथुन भी करती थी।
बाद में मैंने उनकी बेटी नेहा को भी चोदा। फिर माँ बेटी साथ-साथ चुदाने लगी। यह मेरी आप बीती है, इसके बारे में फ़िर कभी लिखूंगा।
rajpal_mmp@rediffmail.com

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June 6, 2009 at 4:15 am

ललिता भाभी की चुदाई

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मेरा नाम नन्द है, मैं ग्वालियर में रहता हूँ। मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव करने का मौका तब मिला जब मैं २१ वर्ष का था, आज मैं वह अनुभव आप सब से बाँटने जा रहा हूँ। इस समय मेरी उम्र २३ साल की है और मेरा शरीर तंदुरुस्त है और मेरी लम्बाई ५’९” है।
मैंने अपना कुँवारापन अपनी पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ खोया। उनकी सुन्दरता के बारे में क्या बताऊँ आप लोगों को ! फिगर ३५-३०-३६ की होगी। उनके मनमोहक शरीर को देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उनके साथ सेक्स करकने की तमन्ना दिल में कब से थी। उनकी उम्र ३० साल की होगी।
एक दिन ऐसा आया जब मुझे उनके बदन को चूमने का मौक़ा मिला। भैया एक बिज़नेसमैन हैं और वो सुबह ही निकल जाते हैं। उनके २ बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। सुबह जब वह कपड़े सुखाने आती है, तब मैं हमेशा उनकी चूचियों और पेट को देखा करता हूँ। उन्होंने कई बार शायद मुझे देखा भी है कि मैं उन्हें छुप कर उन्हें देखता हूँ, पर उन्होंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं। उनके मम्मों को देख कर उनका दूध पीने की इच्छा जाग जाती है। तो दोस्तों आपको अधिक बोर नहीं करते हुए मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ।
एक दिन की बात है, मुझे शहर में किसी काम से बाहर जाना था। घर में माँ और पिताजी दोनों ही नहीं थे, और घर में हेलमेट भी नहीं था और कविता भाभी के घर में सिर्फ कविता भाभी ही थी। मुझे अचानक याद आया कि भाभी के घर हेलमेट हो सकता है। तो मैं घर पर ताला लगा कर भाभी के घर हेलमेट लेने चला गया। भाभी कपड़े धो रही थी। जब वह कपड़े धोते हुए उठी तो उनकी साड़ी एक ओर हटी हुई थी और मुझे उनकी दोनों चूचियाँ ब्लाऊज़ में से दिखाई दे रहे थे। मन हो रहा था कि दूध पी लूँ। मैं उन्हें टकटकी लगा कर देखता जा रहा था, भाभी ने भी यह ग़ौर किया और अपनी साड़ी ठीक करते हुए मुझसे काम पूछा।
मैंने बताया कि हेलमेट चाहिए। भाभी ने कहा कि हेलमेट तो कमरे के ऊपर स्टोर में रखा है, चढ़कर उतारना पड़ेगा। भाभी और मैं कमरे में आ गए। मैं एक कुर्सी लेकर आ गया। भाभी ने मुझसे पूछा,”तुम रोज़ मुझे छुप-छुप कर क्यों देखते हो?”
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,”आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं।”
भाभी ने एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे देखा. मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें एक बार चूमना चाहता हूँ। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गालों पर चूम लिया और उसके साथ ही अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
भाभी ने हँस कर कहा, “अब ठीक है, या कुछ और भी करना है?”
मन तो कर रहा था कि कह दूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी। तो मैंने भी हँस कर कह दिया, “अनुमति मिल जाए तो सब कुछ कर दूँगा।”
वह मुझे शैतान कह कर कुर्सी पर चढ़ गई। अब भाभी अपने दोनों हाथ ऊपर कर के हेलमेट तलाश कर रही थी। उसे इस अवस्था में खड़ा देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं उनके मम्मों और पेट को ही देखे जा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतने नज़दीक से देखा था। अब मेरा नियंत्रण छूट रहा था। तभी भाभी ने मुझसे कहा कि कुर्सी हिल रही है, मुझे आकर पकड़ लो, नहीं तो मैं गिर जाऊँगी।
अब क्या था, मैंने भाभी की गाँड के नीचे से इस तरह पकड़ा कि मेरा चेहरा उनके पेट के सामने रहे। मेरे और उसके पेट के बीच कुछ ही सेन्टीमीटर का फ़ासला था। अब मेरा नियंत्रण छूट गया और मैंने भाभी के पेट पर चूम लिया।
भाभी सहम गई पर कुछ कहा नहीं। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके पेट पर किस करना शुरु कर दिया। मैं उन्हें पेट पर चूम रहा था और उनकी नाभि को खा रहा था। अब वो मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट से चिपकाने लगी और लम्बी-लम्बी साँसों के साथ हल्की सिसकियाँ लेने लगी।
उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था। १५ मिनटों तक उनके पेट को खाने के बाद वह कुर्सी पर बैट गई और मुझसे लिपट गई। अब मुझे हरी झंडी मिल गई थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी भी। वह सच में कितनी सेक्सी लग रही थी – काम की देवी। मैं उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी प्रत्युत्तर देने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले से होते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा।
उसकी चूचियों को चूसता और दबारा रहा और वह सिसकियाँ निकालती रही। अब मैंने उसकी ब्लाउज़ उतार दी और पेटीकोट में घुस कर उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा। अब मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ प्रविष्ट कर दीं और लगभग १५ मिनट तक उसे उँगली से ही चोदा। उसकी चूत को खूब चाटा।
वह उउम्म्म्म्म…. आहहहहहहह ओओओह्ह्ह्हहहह, और चाटो! की आवाज़ निकाल रही थी। उसका पानी एक बार निकल गया। मैंने वो पूरा पी लिया। अब उसे भी मेरा लंड चूसने था। मेरा लंड साढ़े छः इंच का है। हम 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उसकी चूत खा रहा था और वह मेरा लंड। इसी तरह २० मिनट के बाद वो मुझसे कहने लगी कि और मत तड़पाओ, मुझे जल्दी से चोट दो।
मैंने अपने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा, उसके पाँवों को पैला दिया और ज़ोर के धक्के के साथ लौड़ा अन्दर पेल दिया। वह चिल्लाई और तड़पने लगी। कहने लगी कि धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं उसे चोदता चला गया। थोड़ी देर के बाद वह भी मस्त हो गई और गाँड हिला-हिला कर साथ देने लगी। उसके मुँह से ओओहहहह… आआआआहहहह… और ज़ोर से… हाएएएएए…. म्म्म्म्महह्हहहहह… आआआआआहहहहह की आवाज़ें निकलना रुक ही नहीं रहीं थीं। और अब मैं उसकी एक चूची को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसकी घुँडियों को काट रहा था। उसे चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही बह गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।
वह मुझसे खुश थी। उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता है, मैं जाकर उसका दूध ज़रूर पीता हूँ और उसे चोदता भी हूँ।
मेरी कहानी आप को कैसी लगी, मेल कर के बताएँ

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:15 am

तेल मालिश

with 2 comments

दोस्तों, मैं गुरूजी का सबसे पहले धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मेरी कहानी “आशा भाभी” प्रकाशित की।
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और हर कहानी को बड़े ध्यान से पढ़ता हूँ।
मेरी इस कहानी को पढ़ने वाली सभी चूतों और लौड़ों को मेरा बार बार सलाम !
दोस्तो ! इस कहानी को पढ़कर चूतें और लण्ड पानी छोड़ देंगे, यह मेरा आपसे वादा है और आपका भी मन चुदाई के लिए बेकरार हो जाएगा।
दोस्तों मेरा नाम सुनील है, उमर २८ और लम्बाई ६ फ़ुट है । हमारा परिवार एक संयुक्त परिवार है। मैं आज आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। इसके बाद से तो मेरी जिन्दगी ही एक सेक्सी फ़िल्म जैसी हो गई। हमारे परिवार के सदस्य किसी की शादी में गए हुए थे और हमारे घर में कोई नहीं था। इस लिये मैं शाम को घर वापिस आ गया और पड़ोस वाली चाची के घर चला गया। मेरे चाचा फ़ौज में थे और कुछ दिन पहले ही छुट्टी बिताकर वापिस गए थे इसलिये मेरी चाची घर पे अकेली रहती थी। घर में वैसे तो उनके सास ससुर भी थे पर वो बात कहाँ थी कि जो उनके सुख दुःख बाँट सकें।
मेरी चाची की उमर २६ साल और लम्बाई ५’८” है और उनकी फ़ीगर ३६-३२-३६ की है उनकी शादी को सात साल बीत चुके थे. पर उन्हें औलाद का सुख नसीब नहीं हुआ था। आज भी वो बड़ी सेक्सी नज़र आती हैं। जब पहले भी कभी मैं और चाची घर में अकेले होते थे तो मैंने कई बार झुक कर काम करते समय उनकी गोरी-गोरी छाती देखी थी। उनके वो बड़े बड़े स्तन हमेशा ही मेरी आंखों के सामने घूमते रहते थे। मेरी माँ ने चाची को कह रखा था कि रात को हमारे घर पर सो जाना।
शाम को मैं चाची के घर चला गया। जब चाची घर का काम कर रही थी, उन्होंने काले रंग का सूट और सफेद सलवार पहना हुआ था। गरमी का मौसम होने के कारण उनके कपड़े पतले थे और उसमें से उनके अंदरूनी कपड़े ब्रा और चड्डी साफ़ नज़र आ रहे थे। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान चाची की गांड और बड़े बड़े स्तनों पर था। रात को खाना खाकर मैं अपने घर आ गया। चाची ने कहा कि वो काम निपटा कर थोडी देर में आ रही है। मुझे देर तक टीवी देखने की आदत है इसलिये मैं करीब रात ९:३० तक टीवी देखता रहा।
तभी चाची आ गई। उसके बाद मैंने घर के सभी दरवाजे चेक करके बंद कर दिए। मैंने चाची का बिस्तर भी अपने कमरे में लगा दिया था। थोड़ी देर तक हमने टीवी देखा, फिर चाची मुझसे कहने लगी कि उसे नींद आ रही है और वो सो रही है।
मैंने कहा- ठीक है, तुम सो जाओ।
उसके बाद मैं करीब एक घंटा और टीवी देखता रहा। सोने से पहले जब मैं पेशाब करने के लिये जाने लगा तो मैंने देखा कि चाची अभी तक जाग रही है। मैंने पेशाब करके वापिस आ कर चाची से पूछा- क्या बात है, आपको नींद क्यों नहीं आ रही?
तो चाची ने बताया के उसके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनकी कोई मदद कर सकता हूं तो उन्होंने कहा- प्लीज़ ! सरसों के तेल से मेरे पेट की थोड़ी मालिश कर दोगे?
तो मैंने कहा- ठीक है।
मैं सरसों का तेल लेकर आ गया। उन्होंने अपने पेट पर से कमीज ऊपर कर दिया, मैंने उनके पेट की मालिश करनी शुरु कर दी। मैं करीब ३० मिनट तक उनकी मालिश करता रहा। उसके बाद उनके पेट का दर्द कुछ ठीक हो गया पर अभी भी थोड़ा सा तेल बच गया था तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी पीठ पर लगा दो।
चाची की पीठ से उनका कमीज ठीक से ऊपर नहीं हो रहा था तो चाची बोली- चलो मैं कमीज ही उतार देती हूं।
चाची कमीज उतार कर लेट गई और मैं उनकी लातों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश करने लग गया। ऐसा करते समय मैंने कई बार अपना हाथ उनके स्तनों पे लगाया पर वो कुछ न बोली। फिर मालिश करने के बाद अपने बिस्तर में चला गया।
अभी मुझे लेटे हुए थोड़ा वक्त ही हुआ था कि चाची मेरी चारपाई के पास आ गई और मेरे ऊपर बैठ गई। मुझे पता नहीं चल रहा था कि मैं क्या करूं।
मैंने चाची से पूछा- आप यह क्या कर रही हो?
तो वो बोली- आज तूने मेरे स्तनों को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत को जगा दिया है और अब इसकी गरमी को ठंडा भी तुम्हें ही करना पड़ेगा।
वो चाची जिसके साथ नंगा सोने के मैं सिर्फ़ सपने ही देखता था वो आज मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई थी। मेरा सपना सच होने जा रहा था इस लिये मैं बहुत खुश था।
फिर मैंने और चाची ने अपना काम शुरु कर दिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों में डाल लिये और १० मिनट तक मुझे चूमती रही। पहले मैने अपनी जीभ चाची के मुंह में डाल दी और फिर उसने मेरे। फिर चाची ने अपनी सलवार उतार दी और अब उसने सिर्फ़ ब्रा और चड्डी ही पहनी हुई थी। फिर वो बिस्तर पर लेट गई और मैं उसके ऊपर।
फिर हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूजे को चूमते रहे, कभी मैं उसकी छाती को चूमता, कभी उसके पेट को, तो कभी लातों को। फिर चाची ने अपनी ब्रा उतार दी और मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स चूसने शुरु कर दिया। उसके चूचुक सख्त हो गए थे और चूची सख्त कठोर होती जा रही थी। मैं उन्हें मस्त होकर चूसे जा रहा था।
फिर चाची ने अपनी चड्डी भी उतार दी और मेरे साथ लेट गई। चाची की चूत बहुत बड़ी थी। मैंने उसको चाटना शुरु कर दिया। फिर ५-६ मिनट में चाची पहली बार झड़ गई। उसके बाद चाची ने मेरा बड़ा सा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लग गई मैंने भी उनके मुंह में ही पिचकारी मार दी।
फिर चाची ने कहा- चलो अब असली काम करते हैं !
चाची टांगों को थोड़ा खोल कर सीधी लेट गई। मैंने ऊपर से अपना लंड चाची की चूत में डाल दिया, वो बहुत खुश थी क्योंकि आज बहुत वक्त बाद उसकी चूत में लंड घुसा था। मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया। चाची ने भी आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकालनी शुरु कर दी। मैं करीब तीस मिनट तक चाची की चूत चोदता रहा, इसमें चाची दो बार झड़ चुकी थी।
फिर मैंने चाची को कहा- मैं अब तुम्हें घोड़ी की तरह चोदना चाहता हूँ।
चाची घोड़ी बन गई, मैंने लंड को पीछे से उसकी चूत में घुसेड़ दिया। चाची की चूत पीछे से बड़ी तंग महसूस हो रही थी। उन्हें दर्द हुआ और वो चिल्ला दी- आऐईईईइईईईए माआआआआअ !
मैंने जोर जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और १५ मिनट तक चाची को चोदता रहा। मैंने चाची जैसी गरम औरत की कभी नहीं ली थी। फिर मेरा छूट गया और मैं चाची को चूमने लग गया। थोड़ी देर में ही लंड फिर से सलामी देने लगा। फिर चाची ने बोला कि मैं एक बार फिर उनकी चूत मारूं !
इस बार वो मेरे ऊपर बैठ गई और अपने आप हिल हिल कर धक्के देने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उस सारी रात चाची की चार बार चूत मारी। चाची ने मुझसे सुबह कहा कि अब उनकी तमन्ना जरूर पूरी हो जायेगी।
इसके बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम यह खेल खेलते रहे। कुछ महीने बाद चाची ने एक दिन मुझे बताया- मैं माँ बनने वाली हूँ और यह सब तुम्हारी ही बदौलत है कि मुझे माँ बनने का सुख मिला है पर मुझे डर है कि तुम कहीं ये सब किसी को कह न दो।
मैंने चाची को विश्वास दिलाया कि ऐसा कभी नहीं होगा और यह बात हमारे बीच ही रहेगी।
उस दिन से आज तक पता नहीं मैं कितनी ही ऐसे चाचियों और भाभियों को ये सुख दे चुका हूँ।
तो दोस्तों मुझे मेल करना न भूलें, आपके मेल का इंतजार रहेगा।
आपका
अजनबी दहिया
ajnabi2380@gmail.com

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:14 am

बस में मिला बड़ी उम्र का दोस्त

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हेलो दोस्तो…
मेरा नाम निकिता भल्ला है! मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और मैं ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ! मेरी उम्र १८ साल है। मेरे पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी करते हैं, एक बहु-राष्ट्रीय कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर हैं! पर उनके पास मेरे लिए बिलकुल भी समय नहीं है! क्योंकि शायद मैं गोद ली हुई हूँ इसलिए !
और बाद में उन को एक लड़का हो गया, इसलिए अब वो मुझे बोझ समझते हैं! उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं घर आऊँ या ना आऊँ. . . . बस समाज को दिखाने के लिए मुझे रखना मजबूरी है उनकी !
खैर अब मैं भी सब समझती हूँ और उनकी परवाह नहीं करती ! अब मैं भी जिन्दगी के मज़े लेती हूँ!
मेरा कद ५ फीट ३ इंच, मेरा फिगर बड़ा ही सेक्सी है! गोल और कसी हुई चूचियाँ जो ज्यादा बड़ी नहीं पर मस्त दिखती हैं ! चूत मैं हमेशा साफ़ ही रखती हूँ! क्या पता कहाँ कोई लण्ड मिल जाये….. रंग मेरा ऐसा जैसे कि दूध में गुलाब डाल दिया हो! मैं भी एकदम बिंदास रहती हूँ!
मेरा २-३ लड़कों से शारीरिक रिश्ता भी रह चुका है जो मेरी माँ की रिश्ते में ही हैं.. शायद कम उम्र में ही सेक्स करने से अब मुझे लण्ड बहुत अच्छे लगने लगे हैं! लण्ड के बारे में सोचते ही मेरी चूत में पानी आने लगता है!
अब मैं अपनी कहानी बताती हूँ! मैं रोज सुबह बस से स्कूल जाती थी और शाम को वापिस आती थी! कई बार शाम को थोड़ा लेट हो जाती थी! क्योंकि मेरा घर पर मन ही नहीं लगता था! आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली की बसों में कितनी भीड़ रहती है! पर मैं पहले स्टाप से ही बैठती हूँ सो सीट मिल जाती है!
यह एक साल पहले की बात है, ऐसे ही एक दिन मैं बस में जा रही थी! बस में बहुत भीड़ थी! मेरे पास ही एक बड़ी उम्र का आदमी धोती कुर्ता पहने खड़ा था! कद करीब ५ फीट १० इंच होगा! रंग थोड़ा सावंला पर था हट्टा कट्टा ! बड़ी रौबदार मूछें !
मैंने सामने वाली सीट को हाथ से पकड़ा था इसलिए शायद गलती से मेरा हाथ उसके लण्ड से लग गया था, मुझे अच्छा लगा। बस फिर मेरा तो पूरा ध्यान ही वहीं अटक गया! वो बेचारा पीछे हटने की कोशिश करता हर बार! मुझे मज़ा आने लगा, और थोड़ी हंसी भी आ रही थी! मैं अब मज़े लेने के मूड में आ गई थी!
मैंने पूरी बस में देखा- आस पास सभी औरतें ही थी, बहुत भीड़ थी, शायद सभी के पास आज सामान कुछ ज्यादा ही था! मेरे बाजू वाली सीट पर एक लड़की बहुत सारा सामान ले कर बैठी थी!
मैंने अपना बैग अपनी टांगों पे रख लिया! अ़ब मैं आगे झुक के सोने का नाटक करने लगी और हाथ को आगे वाली सीट के पाइप पे रख के जरा बाहर निकाल लिया, पर वो थोड़ा पीछे हो गया! पर झटकों से कभी कभी उसका लण्ड मेरी उंगलियों से छू जाता था!
अब मुझे मज़ा आने लगा.. मेरी चूत में खुजली होने लगी थी! मैंने नीचे ही नीचे अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल लिए ओर पीछे हो कर बैठ गई!
अब ऊपर से मेरी सफ़ेद ब्रा और गोल गोल चूचियां साफ़ दिख रही थी! मैंने अपने बैग को पेट से चिपका लिया ताकि मेरी चूचियां थोड़ी और ऊपर उठ जाएँ और बाहर ज्यादा नज़ारा दिख सके.. मैं नोट कर रही थी कि वो आदमी मुझे देख रहा है पर जब भी मैं ऊपर देखती हूँ तो वो नज़रें घूमा लेता है! शायद उसे अपनी बड़ी उम्र का अहसाह था!
पर मुझे तो मस्ती सूझ रही थी! मुझे और शरारत सूझी और मैं बाहर स्टैंड देखने के लिए थोड़ा उठी और चुपके से साइड से अपनी स्कर्ट सीट के पीछे अटका दी और बैठ गई! जैसे ही मैं बैठी, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी पैंटी दिखने लगी, जो कि बहुत पतली थी! पैंटी में से मेरे चूत के होंट साफ़ दिखाई देते थे!
मैं झट से दोबारा उठी और स्कर्ट ठीक कर के बैठ गई, जैसे गलती से स्कर्ट अटक गई हो.. पर जो मैं दिखाना चाहती थी, वो उस आदमी ने देख लिया था!
मैंने उपर देखा और हल्के से मुस्करा दी! मैंने महसूस किया कि उस आदमी का लण्ड टाइट होने लगा था। वो अब भी कुछ शरमा रहा था पर मैंने हाथ को सामने वाली सीट पे ही लगा के रखा था! जब भी कोई उतरता था तो उसे आगे होना पड़ता था ओर मेरा हाथ उसके लण्ड से छू जाता था!
तभी बस में और भीड़ चढ़ गई! अब तो बस खचखच भरी थी! तभी मैंने देखा के पास में एक औरत सामान के साथ खड़ी थी! मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसे अपनी सीट दे दी! अब मैं उस आदमी के सामने खड़ी हो गई! मेरी सीट पे वो औरत बैठ गई, उसकी गोद में सामान था और उसने मेरा बैग भी अपनी गोद में रख लिया था! बस फिर चल पड़ी!
अब मेरा ध्यान उस आदमी के लण्ड पे था! मुझे उस आदमी का लण्ड अपनी गांड के थोड़ा ऊपर महसूस हो रहा था! मैंने एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा लिया ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! वाह… क्या लण्ड था उसका!
मैं उसके लण्ड का जायजा लेने लगी..जिससे मेरी चूत में पानी आने लगा था! पर वो आदमी कोई हरकत नहीं कर रहा था! अब मुझे उस पे गुस्सा आ रहा था! अ़ब मैं काफी गरम हो चुकी थी!
तब मैंने थोड़ी हिम्मत करके हाथ धीरे से पीछे ले जाकर उसके लण्ड को छुआ! मैं उसे सहलाने लगी जिससे वो और कड़क हो गया! मुझे मज़ा आने लगा। मैं उसके लण्ड को हल्के- हल्के से सहला रही थी, पर तभी उसने मेरा हाथ अपने लण्ड से हटा दिया! मैंने पीछे मुड़ के देखा, वो चुपचाप था पर आगे की ओर आ गया था! अब वो अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में दबा रहा था! मुझे खुशी हुई कि वो अब मेरा साथ दे रहा था!
मेरी स्कर्ट में साइड में चैन थी! सो मैंने धीरे धीरे स्कर्ट घुमाना शुरु कर दिया! मैं साथ साथ बस में भी नज़र मार रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है! पर शायद भीड़ होने की वज़ह से कोई नहीं देख पा रहा था!
अब मेरी स्कर्ट की जिप पीछे थी जो मैं पहले ही खोल चुकी थी! उसका लण्ड अ़ब मैं और अच्छे से महसूस कर सकती थी! कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, हर झटके के साथ वो अपने लण्ड का दबाव और बढ़ा देता! मुझे मज़ा आ रहा था! मैंने पीछे मुड़ के देखा पर वो ऐसे देख रहा था जैसे कुछ हो ही नहीं रहा था!
मैं अ़ब और आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए अ़ब मैंने पीछे हाथ कर के उसकी धोती में हाथ डाल दिया और उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा पर उसने मेरा हाथ झटक दिया! मैंने उसकी ओर देखा, वो हल्के से मुस्कराया और उसने बस में होने का अहसास कराया!
मैंने धीरे से पीछे हट के उसके कान में कहा,”इतनी भीड़ में कोई नहीं देख रहा, अभी भीड़ कम नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी, मैं रोज़ इसी बस मैं जाती हूँ, तुम बस मज़ा लो !”
और मैं उसकी तरफ मुस्करा दी.. जवाब में उसने भी एक प्यारी से मुस्कराहट दी.. .
वो थोड़ा शरमाया और ऐसे ही लण्ड को दबाता रहा! मैंने सोचा- चलो कोई नहीं ! इतना मज़ा तो आ रहा है! पर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो अपनी धोती में हाथ डाल रहा है! तभी मैंने अपनी पैंटी पे उसका लण्ड उठा हुआ महसूस किया! मैं फिर से ऊपर उठ गई ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! मैं बार बार ऊपर उठ रही थी, यह बात उसने भांप ली, सो उसने मेरी एड़ियों के नीचे अपने पैर लगा दिए, जिससे वो मेरे और पास आ गया और मैं ऊपर उठ गई!
मैंने आगे देखा तो मेरे सामने सामान ही सामान था, मैंने चुपके से अपनी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरु कर दी पर एक लिमिट से ज्यादा नहीं उठा सकती थी, नहीं तो किसी को पता चल जाता! इसलिए स्कर्ट को वापिस नीचे ही कर दिया! पर मेरा मन तो पूरे मज़े लेने का था!
मैं थोड़ा आगे की तरफ हो गई ताकि उसके और मेरे बीच कुछ गैप बन जाए। मैंने अपनी टांगो को थोड़ा फैला लिया! अब मैंने पीछे हाथ ले जा कर उसके लण्ड को अपने स्कर्ट की जिप से दोनों टांगो के बीच में फंसा लिया! यार क्या गरम लण्ड था…….स्स्स्स्स्स्स्स्स्स……म्मम्मम……… ..
मैं उसका लण्ड अपनी दोनों टांगो पे महसूस कर रही थी! ऐसा लगता था कि मैं किसी बड़ी मोटी गरम रॉड पे बठी हूँ! मैंने अपनी गाण्ड थोड़ा पीछे धकेल दी और वो भी थोड़ा आगे आ गया! उसका लण्ड मेरी टांगों पे रगड़ता हुआ आगे आ गया! अब उसके लण्ड का आगे वाले हिस्से का उभार स्किर्ट पे आगे की साइड दिख रहा था, इसलिए मैं थोड़ा आगे झुक गई ताकि स्कर्ट ऊपर उठ जाये!
“म्मम्मम्म………
उसका गरम लण्ड मैंने टांगों के बीच दबा रखा था जो कि हर झटके में आगे पीछे हो रहा था! एक तरह से वो मेरी टांगों को चोद रहा था, मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी! मेरा मन हो रहा था कि अपनी पैंटी को हाथ डाल के हटा दूँ ताकि उसके लण्ड की गर्मी अपनी चूत पर महसूस कर सकूँ! पर शायद बस में यह नहीं हो सकता था!
मैं पीछे मुड़ी और उसके कान में धीरे से कहा,” अपने हाथ से मेरी पैंटी साइड में कर दो प्लीज़…!” और वापिस आगे देखने लगी।
उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर स्कर्ट की जिप से २ उँगलियाँ अंदर डाली ओर मेरी पैंटी को साइड में कर दिया!
मैं तो जैसे ……… अपने होश ही खो बैठी थी! उसका गरम लण्ड मेरी चूत पे लगा हुआ था। अब उसका लण्ड मेरी चूत पे रगड़ खा रहा था, शायद चूत के पानी की वज़ह से जो मेरी टांगों तक आ गया था, वो अ़ब आराम से आगे पीछे जा रहा था! मेरी आँखे बंद हो रही थी!
मेरा चेहरा लाल हो गया था पर मैं सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी! मैंने आस पास देखा पर कोई भी हमारी तरफ नहीं देख रहा था! बस के हर झटके के साथ वो मेरी टांगों में झटके मार रहा था! उसका गरम लण्ड जब भी आगे या पीछे होता मेरी चूत में आग बढ़ जाती!
तभी एक तेज़ झटका लगा और उसका लण्ड पीछे चला गया, आगे से मेरी पैंटी थोड़ा अपनी जगह पर वापिस आ गई! जब उसने लण्ड वापिस आगे किया तो वो मेरी पैंटी में चला गया म्म्म्म्म्म्म्म…………………………….. …
अब उसका लण्ड मेरी पैंटी में था और चूत के होठों के बीच में ….. ऊपर नीचे हो रहा था……….! मुझे और मज़ा आने लगा, … और मैंने एड़ियों को और ऊपर उठा लिया। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसलिए उसने झटके बढ़ा दिए। तभी बस रेड लाइट पे रूक गई और झटके बंद हो गए! मैंने पेट के नीचे खुजली करने के बहाने से हाथ स्कर्ट पे ले जा के उसके लण्ड के सुपाड़े को मसलने लगी! मैंने पीछे मुड़ के देखा तो उसका पूरा चेहरा पसीने से गीला हो गया था!
तभी बस चल पड़ी पर मेरे मसलने से शायद वो झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी गाण्ड को हल्के हल्के ऊपर नीचे करने लगी! स्स्स्स्स्स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ मज़ा बढ़ने लगा था… मेरी चूत में कैसे खलबली मच गई थी…… तभी मैंने एड़ियों को ऊपर उठा लिया और मेरा शरीर टाइट हो गया !
मैं …..में…….झड़ने वाली थी, और ….औ ..औम्मम्मम… औ..आह्ह्ह्छ ….. में उसके ऊपर झड़ गई और मेरा सारा जूस उसके लण्ड पे आ गया! और मैं ढीली होती चली गई! उसने भी एक दो झटके लगाये और सारा वीर्य मेरी पैंटी में छोड़ दिया, जिसे में अपनी जांघों तक महसूस कर रही थी!
२-३ मिनट तक हम ऐसे ही रहे और फ़िर वो अपना लण्ड बाहर निकलने लगा। मैंने अपना हाथ पीछे लगा लिया ताकि उसके वीर्य से मेरी स्कर्ट ख़राब न हो! सारा वीर्य मैंने अपने हाथ से पौंछ लिया और उसने अपना लण्ड वापिस अपनी धोती में कर लिया! तभी एक स्टाप आया और मैं उतर गई, पता चला कि ४ स्टाप आगे आ गई हूँ पर इस स्टाप पे ज्यादा लोग नहीं होते क्योंकि यह दिल्ली का बाहरी इलाका था,
और आज तो ये स्टाप बिल्कुल खाली था, पता नहीं क्यों… शायद हमारी किस्मत………
वो आदमी भी वहीं उतर गया! मैंने इधर उधर देखा, फिर उसकी तरफ देख के अपने हाथों को चूसने लगी चाट -चाट के सारा हाथ साफ़ कर लिया!
तब थोड़ी देर बात करने के बाद उसने बताया कि वो यहाँ से ८० किलोमीटर दूर गाँव में रहता है, यहाँ अपने बेटे के पास आया है, पूरा दिन खाली रहता है इसलिए सोचा आज एक दोस्त से मिल आऊँ, उसका नाम महादेव सिंह है। मेरा भी स्कूल मिस हो गया था सो हम बस स्टाप के साथ में बने पार्क में गए और एक पेड़ों से घिरी जगह बैठ गए! वहाँ पहले तो मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाल के सारा वीर्य हाथों से साफ़ किया और हाथों को चटकारे ले ले कर चूसना शुरु कर दिया..! पर किसी के आने की आहट से हम सतर्क हो गए, वहाँ पार्क में कुछ दूर कुछ लोग आ के बैठ गए थे और शायद उनका लम्बे समय तक बैठने का कार्यक्रम था!
इसलिए हम कल फिर वहीं मिलने का वादा कर के वापिस चल पड़े क्योंकि उसे भी कुछ जल्दी थी! वो शायद अपने दोस्त के घर के लिए चला गया और मैं अपनी बस की प्रतीक्षा करने लगी..
और बस पकड़ के अपने घर आ गई………………….
आगे क्या हुआ बाद में….
nikitalove69@yahoo.com

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:13 am

दोस्तों का जाल

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नमस्कार!
अन्तर्वासना के पाठकों को पुलकित झा का नमस्कार। घरेलू कहानियों के शौकीन पाठकों के लिए हाज़िर है एक और मस्त कहानी…
जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ कि मेरी कहानियाँ मेरी कल्पनाओं पर आधारित हैं, परन्तु पाठकों ने इन्हें इतना पसन्द किया कि मैं फिर एक नई कहानी पेश कर रहा हूँ।
मेरे पिताजी का तबादला हो गया और हम एक नए शहर में आ गए और एक साधारण से मुहल्ले में किराए पर रहने लगे। मुझे अपने से बड़ों से दोस्ती करने का शौक था सो मेरी दोस्ती राजन और रमेश से हो गई। वे दोनों दीदी के कॉलेज में ही पढ़ते थे और बिगड़े हुए रईसज़ादे थे। दीदी बस से कॉलेज जाती थी। कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा फिर एक लड़का दीदी के पीछे पड़ गया और उसने दीदी को छेड़ना शुरु कर दिया।
दीदी बहुत परेशान रहने लगी, फिर एक दिन मुझे बता दिया। मैंने राजन से इस बारे में बात की तो उन्होंने उस लड़के को पीट दिया, और कुछ दिन तक दीदी के आने-जाने पर भी नज़र रखी। कॉलेज में भी वे उसका ध्यान रखने लगे। इधर मेरी दोस्ती भी उनके साथ बढ़ने लगी। मैं जब भी उनके साथ होता था तो अक्सर सेक्स की, विशेष रुप से घरेलू सेक्स की बातें करते थे। मुझे बहुत मज़ा आता था।
उनकी बातों से प्रेरित होकर मैंने दीदी के लिए ताक-झाँक करनी शुरु कर दी, और फिर एक दिन बाथरूम में उसे नंगी नहाते हुए देखा। पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा… आआआहहहह्हहहह… नंगी तस्वीरें तो बहुत देखी थीं, पर वास्तविक लड़की… आआहह्हह। फिर मैंने बार-बार झाँकना शुरु कर दिया। मुझे यह हज़म नहीं हो रहा था। अब जब भी राजन और रमेश बातें करते थे, उसकी चूत-गाँड-चूचियाँ मेरी आँखों के सामने तैरने लगती थीं। राजन और रमेश ने इसे ताड़ लिया। अब वे मुझे अपनी बातों में अधिक शामिल करने लगे और मैं भी खुल गया और बातों ही बातों में उन्हें बता दिया।
“अरे वाह, तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला…! ” राजन ने मेरी पाठ पर एक धौल जमाते हुए कहा।
“तुम लोग ऐसी बातें करते हो, तो मेरा मन फिसल गया…”
“अरे बहुत बढ़िया किया… हाय… कुँवारी चूत को आँखों से चोद रहा है….” रमेश बोला।
“यार कुछ भी कहो… तेरी बहन है माल… शरीर पर बाल हैं या चिकनी-चिकनी एक दम…”
“तू कहे तो चोद लें…”
“बात करना अलग बात है… ऐसी लड़की नहीं है वो…” मैंने कहा, तो वे दोनों मुस्कुराए।
“अब जब बात खुल ही गई है, तो तुझे बता दें कि पटा तो हमने लिया है उसे… पर तेरा लिहाज़ था सो हमने बात बढ़ाई नहीं है…” राजन ने कहा।
“वरना, वो तो कब से टाँगें फैलाए लेटी है हमारे लिए…” रमेश हँसते हुए बोला।
“शट अप… वो ऐसी नहीं है… मैं नहीं मानता…”
“तू अगर शर्त लगाए तो तेरे सामने चोद के दिखा दें…”
“शर्त मतलब…?”
“हम जीते तो तू हमें अपना जीजा मान लेना।”
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“और फिर हम तेरे घर में आकर ही उसे चोदा करेंगे!!!!” राजन ने कहा।
मुझे उनकी बातें बुरी नहीं लग रहीं थीं, पर बनावटी नराज़गी दिखाते हुए मैंने उनकी शर्त मान ली। फिर कुछ दिनों तक हमारे बीच कोई बात नहीं हुई। फिर एक दिन शाम को सात बजे राजन का फोन आया और उसने मुझे साढ़े आठ बजे कॉलेज की कैन्टीन में आने को कहा। दरअसल उस दिन कॉलेज का वार्षिक महोत्सव था। दीदी शाम छः बजे ही चली गई थी और दस बजे तक आने की कह गई थी। राजन के फोन का मतलब तो मेरी समझ में नहीं आया पर मैं आठ बजकर बीस मिनट पर वहाँ पहुँच गया। राजन बाहर ही खड़ा मिला और मुझे देखते ही अँधेरे कोने में ले गया…
“क्या बात है, मुझे क्यों बुलाया…”
“चुप आवाज़ मत कर… आज हम शर्त जीतने वाले हैं… राजन लेने गया है…” वह कुटिलता से हँसते हुए बोल…।
“किसे…” मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा…।
“तेरी बहन को… साले… आज तुझे अपना साला बनाएँगे…”
“मैं जा रहा हूँ… मुझे अजीब सा लग रहा है…”
“पागल है… आज सीधा प्रसारण देख… और फिर तूने वायदा किया है कि तू हमें सपोर्ट करेगा…”
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। तभी राजन दीदी को लाते हुए दिखा। रमेश ने मुझे एक ऐसी जगह छुपा दिया, जहाँ एक खिड़की थी। कमरे में एक बिस्तर था। तभी राजन दीदी को लेकर कमरे में आया। दीदी कुछ सहमी सी तो थी, पर आई अपनी मर्ज़ी से थी। रमेश भी वहाँ पहुँच गया और उसने दरवाज़ा बन्द कर लिया।
“ये कहाँ ले आए हो… कोई आ गया तो मैं बदनाम हो जाऊँगी…” दीदी ने कुछ सहमते हुए कहा तो रमेश ने उसे बाँहों में भींचते हुए कहा…
“चिन्ता मत कर रानी… यहाँ कोई डर नहीं है…”
“नहीं.. यहाँ… नहीं…”
“अब नखरे मत कर… इतने दिनों से मौक़ा तलाश कर रहे थे…” और फिर रमेश ने उसे नंगा करना शुरु किया तो वह कुछ विरोध करने लगी, पर उन्होंने उसकी परवाह नहीं की। राजन भी वहाँ आ गया। रमेश ने उसकी शर्ट उतारी तो राजने ने उसकी जीन्स खोल दी और कुछ ही पल में वह ब्रा और पैन्टी में थी।
मेरी साँसें फूलने लगीं। राजने ने ब्रा भी खोल दी, तो दीदी नीचे बैठ गई। फिर वे भी नंगे हो गए। उनके लंड तने हुए थे। उन्होंने दीदी को उठाया और सीधे बिस्तर पर ले गए और फिर दोनों ओर से लिपट गए। वह ना-ना करती रही और वे उसके अंगों से खेलते रहे। उसे पता भी नहीं चला कि कब उसकी ब्रा-पैन्टी उसका साथ छोड़ गई। थोड़ी देर में वह भी गरम हो गई और फिर उनका साथ देने लगी, तो उन्होंने उसे सीधा किया और फिर पहले राजने ने नम्बर लिया। वह टाँगों के बीच में आया और उसकी टाँग उठा कर अपना लंड उसकी चूत की छेद पर टिका दिया। रमेश इस बीच चूचियों को सँभाल रहा था और दीदी उसके लंड से खेल रही थी कि राजन ने एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया… दीदी की चीख निकलने को हुई कि रमेश ने उसका मुँह अपने होंठों से बन्द कर दिया और फिर राजन पिल पड़ा… वह कराह रही थी, पर वह पूरी ताक़त से चोदे जा रहा था। दो सौ से भी अधिक चोट मारने के बाद वह चूत में झड़ गया। दीदी निढाल सी हो गई। उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था। रमेश ने उसकी चूत कपड़े से पौंछी तो वह उठ बैठी…
“अब नहीं…”
“अच्छा… अब मेरा नम्बर आया तो नहीं कर रही है…?” चूत पौंछ कर वह बगल में लेट गया।
“थोड़ा रुक कर, कर लेंगे…”
“चिन्ता मत कर, मैं उस राजन की तरह गँवार नहीं हूँ… प्यार से चोदूँगा।”
और फिर वह उसे चूमने-चाटने लगा। जब वह थोड़ी सामान्य हुई, तो वह ऊपर लेट गया और लंड चूत की दरार में रगड़ने लगा। दीदी की चूत फिर गरम होने लगी तो रमेश ने धीरे से लंड चूत में उतार दिया और फिर पहले धीरे-धीरे चोदने लगा। जब वह पूरी तरह से मज़े लेने लगी तो उसने गति बढ़ा दी। वह आह्ह्हह… आह्हहह करने लगी, पर रमेश ने भी पूरी ताक़त से उसकी चूत ठोंकी। वह निढाल हो चुकी थी। वे दोनों भी उसकी बगल में लेट गए तो मैं भाग आया।
दूसरे दिन फिर शर्त के अनुसार मैंने दोनों को जीजाजी कहा।
pulkitjha@yahoo.com

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:12 am

मस्त पिछाड़ी चुद गई

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मेरा नाम जय कुमार, उम्र बीस वर्ष है। मेरे पापा दुबई में एक पांच सितारा होटल में काम करते हैं। पापा की अच्छी आमदनी है, काफ़ी पैसा घर पर भेजते हैं। घर पर मम्मी और मैं ही हैं। मम्मी एक स्कूल में टीचर हैं और मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ।
घर में काम काज के लिये एक नौकरानी दीपा रखी हुई है। दीपा बाईस साल की शादीशुदा लड़की है। उसका पति एक प्राईवेट स्कूल में चपरासी है। दीपा एक दुबली पतली पर गोरी चिट्टी लड़की है। वो घर पर काम करने छ: बजे आ जाती और साढ़े सात बजे तक घर का काम पूरा करके चली जाती है। फिर मम्मी भी स्कूल चली जाती हैं।
दीपा जब सवेरे काम करने आती है तब मैं सोता ही होता हूँ। वह मुझे बड़ी देर तक सोता हुआ देखती रहती थी। उस समय मैं सुस्ती में पड़ा अलसाया सा बस आंखे बन्द किये लेटा रहता था। मुझे सुबह पेशाब भी लगता था, पर फिर भी मैं नहीं उठता था। नतीजा ये होता था कि पेशाब की नली मूत्र से भरी होने के कारण लण्ड खड़ा हो जाता था तो मेरे पजामे को तम्बू बना देता था। दीपा बस वहीं खड़े लण्ड को देखा करती थी। मुझे भी ये जान कर कि नौकरानी ये सब देख रही है, सनसनी होने लगती थी। मुझे सोया जान कर कभी कभी वो उसे छू भी लेती थी, तो मेरे शरीर को एक बिजली जैसा झटका भी लगता था।
फिर जब वो दूसरा काम करने लगती थी तो तो मैं उठ जाता था। वो अधिकतर सलवार कुर्ते में आती थी। कुर्ता कमर तक खुला हुआ था जैसा कि आजकल लड़कियाँ पहनती है। जब वो सफ़ाई करती थी तब या बर्तन करती थी तब, वो कुर्ता कमर तक ऊपर उठा कर बैठ कर काम करती थी तो उसकी चूतड़ की गोलाईयां मुझे बड़ी प्यारी लगती थी। उसके गोल गोल चूतड़ उसके बैठते ही खिल कर अलग अलग दिखने लगते थे। उसके खूबसूरत चूतड़ मेरी आंखों में नंगे नजर आने लगते थे। मुझे उसे चोदने की इच्छा तो होती थी पर हिम्मत नहीं होती थी। कभी कभी उसे आने में देर हो जाती थी तो मम्मी स्कूल के लिये निकल जाती थी। तब वो मुझ पर लाईन मारा करती थी। बार बार मेरे से बात करती थी। बिना बात ही मेरी बातों पर हंसती थी। मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। इन सब से मुझे ऐसा जान पड़ता था कि वो मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाह रही है। तब मैंने उसे पटाने की एक तरकीब सोची।
मैं उस दिन का इन्तज़ार करने लगा वो कभी लेट आयेगी तो मम्मी की अनुपस्थिति का फ़ायदा उठा कर जाल डालूंगा। फ़िलहाल मैंने उसके सामने रुपये गिनना और उसे दिखा दिखा कर अपनी जेब में रखना चालू कर दिया था। एक दिन वो लेट हो ही गई। मम्मी स्कूल जा चुकी थी। मैंने कुछ रुपये अपनी मेज पर रख दिये। दाना डालते ही चिड़िया लालच में आ गई।
मुझसे बोली- जय, मुझे कुछ रुपये उधार दोगे, मैं तनख्वाह पर लौटा दूंगी।”
मैंने उसे पचास का एक नोट दे दिया। एक दो दिन बाद उसने फिर मौका देख कर रुपये और उधार ले लिये। मुझे अब यकीन हो गया कि अब वो मुझसे नहीं बच पायेगी। हमेशा की तरह उसने मुझसे फिर पैसे मांगे। मैंने सोचा अब एक कोशिश कर ही लेनी चाहिये। उसकी बेकरारी भी मुझे नजर आने लगी थी।
“आज उधार एक शर्त पर दूंगा।” वो मेरी तरफ़ आस लगा कर देखने लगी। जैसे ही उसकी नजर मेरे पजामे पर पड़ी, उसका उठान उसे नजर आ गया। उसने नीचे देख कर मुझे मुस्करा कर देखा, और कहा,” मैं समझ रही हूँ, फिर भी आप शर्त बतायें।”
“आज एक चुम्मा देना होगा” मैंने शरम की दीवार तोड़ ही दी। पर असर कुछ और ही हुआ।
“अरे ये भी कोई शर्त है, आओ ये लो !”
उसे मालूम था कि ऐसी ही कोई फ़रमाईश होगी। उसने मेरे गाल पर चूम लिया। मुझे अच्छा लगा। लण्ड और तन्ना गया। पर ये भी लगा कि चुम्मा तो इसके लिये मामूली बात है।
“एक इधर भी !” मैंने दूसरा गाल भी आगे कर दिया।
“समझ गई मैं !” उसने मेरा चेहरा थाम लिया और मेरे होंठों पर गहरा चुम्मा ले लिया।
“धन्यवाद, दीपा !”
“धन्यवाद तो आपको दूंगी मैं … जानते हो कब से मैं इसका इन्तज़ार कर रही थी !”
मैं सिहर उठा। ये क्या कह रही रही है? पर उसने मेरी हिम्मत बढ़ा दी।
“दीपा, नाराज तो नहीं होगी, अगर मैं भी चुम्मा लू तो”
“जय, देर ना करो, आ जाओ।” उसकी चुन्नी ढलक गई। उसके उरोज किसी पहाड़ी की भांति उभर कर मेरे सामने आ गये। वो मुझे आकर्षित करने लगे। मैंने उसका कुर्ता थोड़ा सा गले से खीच कर उसके उभार लिये हुए उरोजों को अन्दर से झांक कर देखा। उसकी धड़कन बढ़ गई। मेरा दिल भी जोर जोर से धड़कने लगा। उसके उरोज दूध जैसे गोरे और चिकने थे। मैंने अन्दर हाथ डाला तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“जय सिर्फ़, चुम्मा की बात थी, ये मत करो… !” उसने सिसकते हुये मेरा हाथ अपनी छातियों से हटा दिया।
“दीपा, मेरे मन की रख लो, मैं तुम्हें सौ रुपये दूंगा।”
रुपये का नाम सुनते ही वो बेबस हो गई। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैंने उसके कुरते के भीतर हाथ डाल दिया और उसके कोमल और नरम स्तन थाम लिये और उन्हें सहलाने लगा। उसके शरीर में उठती झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। वो अपने धीरे धीरे झुकने लगी। पर उससे उसके चूतड़ो में उभार आने लगा। वो सिसकते हुए जमीन पर बैठ गई। उसके बैठते ही उसके चूतड़ों की दोनों गोलाईयाँ फिर से खिल उठी। वही तो मेरा मन मोहती थी।
मैं उसके पास बैठ गया और उसके चूतड़ो की फ़ांको को हाथ से सहलाने लगा। उसकी दरारों में हाथ घुमाने लगा। मेरा लण्ड बुरी तरह से कड़कने लगा था। उसके चूतड़ों को सहलाने से मेरी वासना बढ़ने लगी। दीपा भी और झुक कर घोड़ी सी बन गई। मैंने उसका कुर्ता गांड से ऊपर उठा दिया ताकी उसकी गोलाईयाँ और मधुर लगे। जोश में मैंने उसकी गाण्ड के छेद में अंगुली दबा दी।
दीपा से भी अब रहा नहीं जा रहा था, उसने हाथ बढ़ा कर मेरा लण्ड पजामे के ऊपर से ही थाम लिया। मेरे मुख से आह निकल पड़ी।
मैंने उसे पकड़ कर खड़ा कर दिया और कहा,”दीपा, तुम्हारी गाण्ड कितनी सुन्दर है, प्लीज मुझे दोगी ना !”
“तुम्हारा लण्ड भी कितना मस्त है, दोगे ना !”
“दीपाऽऽऽऽ !”
दीपा ने नाड़ा खोल कर अपनी सलवार उतार दी और कुर्ता ऊंचा कर लिया। उसके चूतड़ों की गोरी गोरी गोलाईयाँ मेरे सामने चमक उठी। मैं तो उसकी गाण्ड का पहले से ही दीवाना था। उसे देखते ही मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने हाथ में थूक लगा कर उसकी गाण्ड के छेद में लगा दिया और पजामा नीचे करके लण्ड छेद पर रख दिया। मेरे दिल की इच्छा पूरी होने के विचार से ही मेरे लण्ड के मुख पर गीलापन आ गया था। मेरी आंखे बन्द होने लगी। मेरा लण्ड उसके भूरे रंग के छेद पर बार बार जोर लगा रहा था। गुदगुदी के मारे वो भी सिसक उठती थी।
छेद टाईट था पर मर्द कभी हार नहीं मानता। किले को भेद कर अन्दर घुस ही पड़ा। दीपा दर्द से कराह उठी। मुझे भी इस रगड़ से चोट सी लगी। पर मजा अधिक था, जोर लगा कर अन्दर घुसाता ही चला गया। मेरे दिल की मुराद पूरी होने लगी। कमर के साथ मेरे चूतड़ भी आगे पीछे होने लगे। दीपा की गाण्ड चुदने लगी। उसके मुँह से कभी दर्द भरी आह निकलती और कभी आनन्द की सिस्कारियाँ। इतनी सुन्दर और मनमोहक गाण्ड चोद कर मेरी सारी इच्छायें सन्तुष्टि की ओर बढ़ने लगी।
उसके टाईट छेद ने मेरी लण्ड को रगड़ कर रख दिया था। मैं जल्दी ही उत्तेजना की ऊंचाईयों को छूने लगा और झड़ने लगा…मैंने तुरन्त ही अपना लण्ड बाहर खींच लिया और वीर्य की बौछार से गाण्ड गीली होने लगी। मैंने तुरन्त कपड़े से उसे साफ़ कर दिया। हम दोनो ही अब एक दूसरे को चूमने लगे।
वो अब भी प्यासी थी…उसकी चूत मेरे लण्ड से फिर चिपकने लगी थी। मेरा लण्ड एक बार फिर खड़ा हो गया था। मैंने दीपा को बिस्तर पर लिटा दिया और उस पर छाने लगा। वो मेरे नीचे दब गई। लण्ड ने अपनी राह ढूंढ ली थी। नीचे के नरम नरम फूलों की पंखुड़ियों के पट को खोलते हुए मेरा सुपाड़ा खाई में उतरता चला गया। तले पर पहुंच कर गहराई का पता चला और वहीं पर तड़पता रहा।
खाई की दीवारों ने उसे लपेट लिया और लण्ड को सहलाने लगी। मुझे असीम आनन्द का अनुभव होने लगा। लण्ड में मिठास भरने लगी। मेरे धक्के तेज हो चले थे, दीपा भी अपने चूतड़ों को झटका दे दे कर साथ दे रही थी। उसके मटके जैसी कमर और कूल्हे सरकस जैसी कला दिखा रहे थे। मैं चरमसीमा पर एक बार फिर से पहुंचने लग गया था। पर मेरे से पहले दीपा ने अधिक उत्तेजना के कारण अपना पानी छोड़ दिया। मैं भी जोर लगा कर अपना वीर्य निकालने लगा। उसकी चूत वीर्य से भर गई। मेरा पूरा भार एक बार फिर दीपा के शरीर पर आ गया। हम दोनो झड़ चुके थे। दीपा जल्दी से उठी और अपने आप को साफ़ करने लगी।
“जय, सच में मजा आ गया… कल भी मौका निकालना ना !”
अब उसकी नजरें मेरे पर्स पर थी। मैं समझ गया, उसे एक पचास का नोट और दे दिया। अब वो अपनी ऊपरी कमाई से खुश थी। उसने नोट सम्भाल कर रख लिये। और मुस्कुरा कर चल पड़ी…शायद अपनी सफ़लता पर खुश थी कि मुझे पटा कर अच्छी कमाई कर ली थी। और उसे आगे भी कमाई की आशा हो गई थी। लण्ड में ताकत होनी जरूरी थी पर साथ में शायद पैसे की ताकत भी मायने रखती थी… जो कुछ भी हो मैंने तो मैदान मार ही लिया था।
vijaypanditt@gmail.com

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:12 am

रात की ड्यूटी

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मेरा नाम रिंकू शर्मा है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ।
मैं आपको अपनी दो साल पहले की आप बीती बता रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं १२ वीं कक्षा में पढ़ रहा था। मेरे पड़ोस वाले घर में एक नया जोड़ा आया था जिनकी शादी को लगभग २ महीने ही हुए थे। जब मैंने उस औरत को देखा तो मेरे होश ही उड़ गए। वो एक परी के जैसी थी, वो बहुत सुंदर थी और गोरी भी थी मानो ऐसी कि अगर छू लो तो मैली हो जाए, और उसके स्तन बहुत मोटे थे जैसे कि फुटबॉल। जब वो चलती थी तो उसकी गांड को देख कर लण्ड कच्छा फाड़ने को हो जाता था। मैंने जिस दिन से उसे देखा, उसी दिन से मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा और उससे बातें करने की कोशिश करने लगा।
जब मैंने उससे थोड़ा मेल जोल बढ़ाया तो मुझे पता लगा कि उसके पति की रात की जॉब है, य़ानि वो रात में अकेली होती है। अब मैं उससे मिलने का बहाना ढूंढने लगा। तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना उससे कुछ मांगने के बहाने मिला जाये।
मुझे अचानक याद आया कि मुझे अपने प्रिंटर की शिकायत करनी है इसके लिए एम टी एन एल फ़ोन से एच पी सर्विस सेण्टर पर फ्री बात होती है और मेरे घर में एम टी एन एल फ़ोन नहीं है। इसलिए मैं फ़ोन के बहाने उसके घर गया और मैंने रात के आठ बजे उसकी दरवाजे की घंटी बजा दी क्योंकि मैंने पता लगा लिया था कि उसका पति शाम ७ बजे घर से निकल जाता है।
घंटी बजाते ही उसने दरवाजा खोला और बोली- अरे आप ? बोलिए कैसे आना हुआ ?
मैंने कहा- आपके घर में एम टी एन एल फ़ोन है?
उसने कहा- है !
मैंने कहा मेरा प्रिंटर ख़राब हो गया है, इसलिए मुझे उसकी शिकायत सर्विस सेण्टर पर करनी है, एम टी एन एल फ़ोन से कॉल मुफ्त है, यदि मैं अपने फ़ोन से कॉल करता हूँ तो बहुत पैसे लगते हैं।
उसने कहा- आप बैठ कर कॉल करो, मैं आपके लिए चाय बना कर लती हूँ।
उस समय वो क्रीम रंग की नाईटी पहने हुई थी जिसमें से उसके स्तन क़यामत ढा रहे थे, जिनको देख कर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी, मेरी कॉल पर बात चल ही रही थी कि वो चाय ले कर आई और उसने चाय सामने पड़ी मेज़ पर रखी तो मुझे उसके स्तनों के दर्शन साफ़ ढंग से हुए, जिनको देख कर मैं बेचैन हो गया और वो सामने पड़े सोफे पर बैठ गई।
उस समय मेरे दिमाग में यह योजना चल रही थी कि कहाँ से बात शुरू करूँ !
जैसे ही मैंने चाय का पहला घूँट पिया वो बोली कि मैं बिस्कुट लाना तो भूल ही गई और वो बिस्कुट लेने के लिए उठी और रसोई की तरफ जाने लगी। तब मैंने उसकी गांड देखी तो मेरा लंड काबू से बाहर हो गया। जब वो रसोई में गई तो मैंने उसका ख्याल लाकर मुठ्ठी मरना शुरू कर दिया। अचानक उसके पैरों की आहट सुन कर मैंने अपना लंड पैंट में डाल लिया, लेकिन लंड पूरे जोश में खड़ा था।
तभी उसने बिस्कुट मेरे सामने रखे तो वो अचानक भांप गई कि मैं कुछ कर रहा था क्योंकि उसकी नज़र ने मेरे लंड को पैंट में खड़ा देख लिया और मैं हांफ भी रहा था। मुझे लगा वो समझ चुकी है कि मैं मुठ मार रहा था क्योंकि उसके चेहरे के भाव ही कुछ ऐसे थे।
तभी मैंने अपने मन को शांत किया और अपने मन को कहा- साले एक दिन में औरत काबू होकर नहीं चुदती, उसके लिए औरत को समय देना जरुरी है।
तो मैंने सोचा कि पहले इससे दोस्ती करनी होगी। तभी मैं बोला- भाभी जी ! आप क्रीम रंग की नाईटी में बहुत अच्छी लग रही हैं !
उसने मुझे इसके लिए धन्यवाद कहा और हम दोनों बातें करने लगे। बात करते करते रात के १० बज गए, तभी मैंने कहा- भाभी जी मुझे अब घर जाना होगा !
भाभी बोली- थोड़ी देर और रुक जाओ ना ! तुम चले जाओगे तो मैं अकेली हो जाऊंगी, प्लीज़ थोडी देर और !
मैंने कहा- भाभी मेरी सुबह परीक्षा है।
भाभी बोली- किस चीज़ की?
मैंने कहा- फिजिकल एजूकेशन की, और मुझे घर जा कर पढ़ना है।
भाभी बोली- मेरे १२ कक्षा में फिजिकल एजूकेशन में ८०% नंबर आए थे, मैं तुम्हें पढ़ा देती हूँ। चलो पूछो- क्या पूछना है? तुम्हारे सारे प्रश्नों का मेरे पास उत्तर है।
मैं खुश हो गया और मैंने प्रश्न किया- लड़कियों की माहवारी कितने दिन बाद आती है?
उसने कहा- २० से ३० दिन के बाद ! और लेट भी हो सकती है, या जल्दी भी आ सकती है।
जैसे ही उसने बताया तो मैं शरमाने लगा !
उसने कहा- शरमाओ मत, पूछो ! जो मन में है !
उसने मेरा होंसला बढाया। तब मैंने पूछा- लड़कियों की चूत पर बाल कितनी उम्र में आते हैं और सम्भोग करते समय लड़कियों के साथ क्या किया जाये कि वो अत्यंत आनंद ले सकें !
भाभी थोड़ी सी हंसी, फ़िर बोली- तुम्हारे प्रश्न तो बड़े टेढ़े हैं पर मैं पीछे नहीं हटने वाली !
मैं समझ गया कि उसके मन में कुछ चल रहा है।
भाभी बोली- चलो, बेडरूम में चल कर पढ़ते हैं।
और हम दोनों बेडरूम में चले गए।उसने कहा- चलो अब बताती हूँ कि लड़कियों की चूत पर बाल कब आते हैं। लड़कियों की चूत पर बाल 12 से 14 साल की उम्र में आते हैं। दूसरी बात- तुमने पूछा था कि लड़कियों के साथ कैसे सम्भोग किया जाए कि वो परम आनन्द ले सकें।
तो इसे समझाने के लिय तो तुम्हें कुछ प्रैक्टीकल करना होगा।
मैं उसका मतलब समझ चुका था।
मैंने कहा- क्या प्रैक्टीकल?
उसने कहा- मुझे यह समझाने के लिए अपना कुछ दिखाना पड़ेगा।
मैंने कहा- दिखा दीजिए।
उसने कहा- डरोगे तो नहीं?
मैंने कहा- मैं कभी नहीं डरता हूँ, मैं पढ़ाई के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।
तभी भाभी ने अपनी नाईटी उतार दी। वो अब एक पारदर्शी चड्डी और ब्रा में थी।
मैंने कहा- यह क्या कर रही हो?
उसने कहा- तुम्हें प्रैक्टिस से पढ़ा रही हूँ।
मेरा लण्ड तन गया था। अब वो मेरे पास आई और उसने मुझसे अपनी कच्छी और ब्रा उतारने को कहा।मैंने वैसा ही किया, उसकी कच्छी और ब्रा उतार दी। उसकी चिकनी चूत देख कर मेरे लौड़े में आग लग गई। अब मैं रुक नहीं पा रहा था। उसने मेरे खड़े लौड़े को पैन्ट में से ही भाम्प लिया।
मैं एकदम डरा हुआ था।
तभी वो बोली- अब क्या हुआ? पहले तो नाईटी में से मेरी गाण्ड देख कर मुट्ठ मार रहे थे। अब लण्ड खड़ा नहीं हो रहा क्या?
मैं चकित रह गया कि उसने मुझे मुट्ठ मारते देख लिया था। तभी उसने मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया और उससे खेलने लगी।
मेरे जोश के सागर में उफ़ान आने लगा। तभी उसने मेरी ज़िप खोल कर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अब मैं भी खुल गया। मैंने उसके स्तन दबाने शुरु कर दिए। वो भी अब जोश में आ गई थी।
तभी उसने मुझे उसकी चूत को चौड़ा करने के लिए कहा।
मैंने चूत के दोनों ओर हाथ लगाया और उसकी चूत को खोल कर चौड़ा कर दिया।
उसने मुझे बताया- अगर मर्द अपने लण्ड की रगड़ औरत की गुठली पर मारता है तो औरत परम आनन्द प्राप्त करती है।
तो मैंने कहा- आप अभी यह आनन्द प्राप्त करना चाह्ती हो?
उसने हंसते हुए कहा- इसके लिए तो इतने पापड़ बेले हैं। चल मादरचोद ! मुझे चोद अब !
अब वो एकदम नंगी होकर बेड पर अपनी टांगें फ़ैला कर लेट गई और कहने लगी- आ जा ! चोद दे मुझे ! चोद डाल !
ऐसा कहते हुए वो अपनी चूत की गुठली को अपन्ने हाथ से रगड़ रही थी।
वो एक बार फ़िर से बोली- चोद दो मुझे !
मैंने इतनी चिकनी चूत पहली बार देखी थी और यह मेरा चूत चोदने का पहला मौका था।
मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का दिया, मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
वो चिल्ला पड़ी, बोली- आराम से डाल मादरचोद ! क्या मेरी चूत फ़ाड़ डालेगा !
मैंने मज़ाक में कहा- हाँ !
उसने कहा- तो देर क्यों लगा रहा है? फ़ाड़ दे चोद चोद कर !
अब मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिए।
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मैंने भी। कुछ देर में हम दोनों की सांसें बढ़ने लगी।
उसने कहा- तेज़ तेज़ चोद !
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने तेज़ तेज़ धक्के लगाए।
वो ‘ हाँ हाँ चोद और चोद ! जोर से चोद दे ! और तेज़ ! तेज़ ! ‘ कहती हुई झड़ गई।
उसके बाद मैं भी झड़ गया। हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और मैं अपने कपड़े पहन कर अपने घर आ गया।
अब जब भी उसका पति रात की ड्यूटी करता है तो मैं उसके साथ रात की ड्यूटी करता हूँ।
तो आपको कैसी लगी मेरी कहानी !
मुझे मेल कीजिए।
rinku0707@gmail.com

Written by Admin

June 6, 2009 at 4:11 am